Advertisement
Advertisement

लोन नहीं भरने वालों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय, लोन लेने वाले जरूर जान लें अपडेट EMI Bounce

Advertisement

आधुनिक समय में फाइनेंशियल जरूरतों और इमरजेंसी के चलते लोन लेना आम बात हो गई है। लेकिन कई बार आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि लोग लोन चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में बैंक कड़ी कार्रवाई करते हैं, जिससे लोनधारकों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो लोन न चुका पाने वालों के लिए जानना बेहद जरूरी है।

लोन न चुकाने पर क्या होता है?

Advertisement

जब कोई व्यक्ति लोन लेता है, तो उसे एक निश्चित समय सीमा में चुकाना होता है। अगर समय पर लोन नहीं चुकाया जाता, तो बैंक नोटिस भेजता है और कड़ी कार्रवाई करता है। इसमें कानूनी प्रक्रिया शुरू करने, संपत्ति जब्त करने और अन्य कठोर कदम उठाने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि बैंक लोन डिफॉल्ट की स्थिति में व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता।

Also Read:
Jio Jio लाया नया रिचार्ज प्लान, मिलेगी 72 दिनों की वैलिडिटी

हाईकोर्ट का एलओसी पर फैसला

Advertisement

दिल्ली हाईकोर्ट ने लुकआउट सर्कुलर (Look Out Circular – LOC) के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि हर लोन डिफॉल्ट के मामले में बैंक एलओसी जारी नहीं कर सकते। एलओसी केवल उन्हीं मामलों में जारी की जा सकती है, जहां व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत कोई आपराधिक आरोप हो। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी जांच एजेंसियों और अदालत के समक्ष उपस्थित हो।

मौलिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

Advertisement
Also Read:
Jio 90 Day Recharge Plans हर महीने रिचार्ज का झंझट खत्म! जियो लाया है 90 दिनों के लिए सस्ता और बेस्ट प्लान! Jio 90 Day Recharge Plans

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी बैंक को लोन डिफॉल्ट की स्थिति में व्यक्ति के मौलिक अधिकार छीनने का अधिकार नहीं है। बिना किसी कानूनी कार्रवाई के एलओसी जारी करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि एलओसी के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

मामले का विवरण: कार लोन विवाद

इस फैसले का आधार एक मामला है, जिसमें याचिकाकर्ता ने 2013 में दो कारें खरीदने के लिए लोन लिया था।

Also Read:
RBI RBI का होम लोन को लेकर बड़ा आदेश, ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर
  • पहली कार के लिए 13 लाख रुपये का लोन लिया गया।
  • दूसरी कार के लिए 12 लाख रुपये का लोन लिया गया।

याचिकाकर्ता ने लोन की किस्तें भरना बंद कर दिया। बैंक ने कई नोटिस भेजे, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार, बैंक ने याचिकाकर्ता के खिलाफ एलओसी जारी कर दी।

कोर्ट का निर्णय

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एलओसी रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह जांच में सहयोग करेंगे और सभी सुनवाई में उपस्थित रहेंगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकार करते हुए एलओसी रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि बिना आपराधिक आरोप के एलओसी जारी करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

Also Read:
LPG 16 जनवरी को कहां मिल रहा सबसे सस्ता LPG गैस सिलेंडर, आपके यहां क्या है आज का रेट, देखें

लोनधारकों के लिए सबक

हाईकोर्ट के इस फैसले से लोनधारकों को कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं:

  1. मौलिक स्वतंत्रता: बैंक आपकी मौलिक स्वतंत्रता को छीन नहीं सकता।
  2. एलओसी की शर्तें: आपके खिलाफ एलओसी तभी जारी हो सकती है, जब आप पर आपराधिक आरोप हों।
  3. बैंक से संवाद: कानूनी नोटिस का जवाब देना और बैंक से संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।

कैसे बचें ऐसी स्थिति से?

Also Read:
RBI RBI ने होम लोन वालों को दी बड़ी राहत, आप भी जान लें ये नए नियम
  1. समय पर लोन चुकाएं: अपनी आय और खर्चों का सही आकलन कर लोन लें और समय पर उसकी किस्तें भरें।
  2. बैंक से बातचीत करें: अगर आप लोन चुकाने में असमर्थ हैं, तो बैंक से संपर्क करें और समाधान निकालने की कोशिश करें।
  3. कानूनी सलाह लें: अगर बैंक आपके खिलाफ कार्रवाई करता है, तो तुरंत कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लें।

दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला लोनधारकों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह स्पष्ट करता है कि आर्थिक संकट में फंसे लोगों को भी कानूनी सुरक्षा का अधिकार है। बैंक और लोनधारकों के बीच संवाद और समझौता ही ऐसी समस्याओं का समाधान है। इस फैसले से यह सुनिश्चित होता है कि बैंक अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करें और हर व्यक्ति को न्याय का अधिकार मिले।

Leave a Comment